Thursday, 27 August 2015

तम्हारे बाल नहीं, तुम उस कमीने के नज़र में नहीं

“तुम्हारा आज रात का ड्यूटी (duty) था ना?”, अदिति ने दरवाजे पर खरे अपने पति अंकुर को पूछा। अंकुर ने कहा, “रात के २ बाज रहे है, सोने चलो”। अदिति हरबरा कर बोली, “अंकुर, में अभी अपने नैना के घर से आ रही हूँ, वो अभी अकेली है ना……”, अंकुर ने उसे बिच में काट के कहा, “तुम कहा गए थी मुझे पता है, इसके बारे में कल बात करेंगे अभी सो जाओ”। यह कहेकर अंकुर कमरे की तरफ चल देता है।
अभी के लिए तो आराम मिला, अदिति ने सोचा। अदिति कमरे में गई, उसे समज में आ रहा था, कि उसने बहुत हल्का बहाना बनाया था। उसने अपने बालो को इकठ्ठा किया और एक जूडा (bun) बना लिया। यह बाल ही तो है, जो शादी के बाद उसके साथ आये है। शादी भाग कर की थी, मायका से एक सारी भी नहीं मिली। कपड़े भी अंकुर के ही थे, वो भी पुलिस का वर्दी. पर शादी के दो साल बाद सब कुछ बदल गया, वो बदल गए, उसका अंकुर के लिए प्यार बदल गया, सिर्फ उसके घने केश नहीं बदले, अब भी कमर तक हि है बाल।
अदिति को नींद की कोई जल्दी नहीं थी। उसे आज  आने भी नहीं वाली थी। उसने बिस्तर पर परे अंकुर के तरफ देखा। अदिति को पता है, वो सोने का नाटक कर रहा है। उसने कमरे कि बत्ती बंद नहीं की। अदिति ने अपने बालो को फिर से खोला और कंगी करने लगी। उसे इन बालो से बहुत लगाव है, बहुत ही महेनत से ये इतने मजबूत बने है।
अदिति अपने बाल सवारना जरी रखा। पीछे से अंकुर की आवाज़ आई, “ पीके आई हो?” अदिति ने जवाब दिया, “पीना क्या इस देश में अपराध है? पुलिसवाले हो, बताओ”। अंकुर बिस्टर में अब बैठ जाता है, “घर की बहु, रात को पिके आये, तो यह गलत है”। वो बात को घुमाने की कोशिश करती है, “पुलिसवाले हो, दारू की गंद तो अच्छी तरह पहेचानते हो, गंध क्या अभी मिली है?” अंकुर का जवाब, “नहीं मुखे समज में तो आई थी, पर में यह तुम्हारे मुह से सुनना चाहता था”। अदिति ने कुछ नहीं कहा, मनो अंकुर को नज़रंदाज़ कर रही हो।
अदिति ने अब कंगी राखी, वो अपने बालो को बांधने जा रही थी कि पीछे से अंकुर ने आकर उसके बालो को मुठ्ठी में पकर लिया और खिंचा जिस्से अदिति को दर्द हुआ। वो बोला, “मुझे सब पता है, तुम आज सुबह घर से निकली, कालेज गई और दोपहर को ही निकल गई, फिर रात के दो बजे तक उस कमीने के साथ घुमती रही” अदिति यह सुन कर थोरी चोंक गई। वो बोलता रहा, “भूलो मत, तुम्हारा पति शहर के पुलिस विभाग का कोई छोटा अफसर नही, अब उसका नाम तुम ही बोलोगी की में बताऊ?” अदिति ने नाटक की, “किस बारे में बोल रहे हो?” अंकुर ने उसके बाल और नही जोर से खिंचा, जिससे अदिति की आँखों में असु आ गए और वो चिखि, “आ आ, बताती हूँ, पर आ आ पहेले छोरों तो”। अंकुर ने अपने पाकर ढीली की। वो बोली, “इतना मुझसे नफरत करते हो तो तलाक क्यों नहीं दे देते?” अंकुर ने जवाब में कहा, “दो साल पहेले, तुम्हे में तुम्हारे घर से तुम्हे छोरदेने के लिए नहीं भागा था।“ फिर उसने अदिति के रस्मे बालो को अपने हाथ में लपेट लिया और उसे खिंच दि। अदिति को अब रोना आ गया। अंकुर बोला, “इन्ही रेशमी बालो से लगाव है ना, उस कमीने को?” अदिति रोटी हुई बोली, “हाँ, हाँ, अब छोरों”।
अंकुर ने अब उसके बालो को बाएँ हाथ से पाकर, और दाहिने हाथ के ऊँगलीओ से कंगी करने लगा। ३ साल पहेले, उसे भी अदिति के केशो ने हि अकर्सित किया था, उसके तन ने नहीं। फिर वो अक कैंची धुंडने लगा।
अदिति अब जोर से हिलने लगी, कैंची के साथ उसे अपने बालो को लगाना बिलकुल पसंद नहीं था।10678675_1528185800749609_488861352134766360_nअंकुर ने कैंची के घातु वाले अंश को एकबर उसके बालो पर लगाया। वो गिरगिराने लगी, “गलती हो गए, कल से मिलने नहीं जाउंगी, छोरों”। अंकुर ने फिर कैंची को अपने सामने रखा, अदिति चुप हो गई, उसने फिर दोनों हाथो से अदिति के बालो को एक जगह इकठ्ठा किया, फिर दाहिने हाथो से कैंची उठाई। अदिति डर के मारे चुप हो गई थी। अंकुर ने फिर कैची के बिच उसके बालो को रखा, उसके गर्दन के पास। और पूछा, “अब मिलने जाओगी?” अदिति के मुह से आवाज़ नहीं निकली, वो बोलना चाहती थी, पास उसका मुह बंद हो गया था। अंकुर ने उसके बालो को। अदिति ने बोलना सुरु किया, “नहीं अब और कभी नै, में अब घर से ही नहीं निकलूंगी, चोर दो, किसी मर्द के साथ आंख नही मिलाऊँगी”। अदिति ने अपने आंखे बंद कर ली।
अंकुर ने कहा, “ठीक है”। और कैंची हटा ली। अदिति ने घुमा और उससे कैंची ले ली। अंकुर ने कहा, “याद रहे, और अब सोने चलो”। अदिति ने हा कहेकर कैंची रखने गई।
अंकुर अचानक बोला, “ठहेरो!” कैंची मुझे दो। अदिति सपकापा गई। अंकुर चिल्लाया तो उसने दे दि। अंकुर ने उससे घुमने को कहा। वो बिना सवाल किये ही घूम गई। अंकुर ने फिर से उसके कमर तक बालो तो पाकर, इस बार उसके फिट के पास। अदिति रोने लगी। अंकुर ने कहा, “एक निशानी तो रहेनी चाहिए, ताकि तुम्हे याद रहे तुमने क्या सोचा है”। उसने कैंची उसके पीठ से थोरी निचे राखी और कच्च्च्चच्च्च्चच………कच्च्च्च.. अदिति के रेशमी बाल जमीन में गिरने लगे। अदिति रोते हुई बोली, “ऐसे मत काटो, टेढ़े काटेंगे” अंकुर ने वह अनसुना करके बाल काटता रहा…….चच्च्च्च। उसके अब कमर तक बाल नहीं रहे।
काटने के बाद, अंकुर ने उसे कैंची थमाई, और बोला, “कल मेरा सुबह ड्यूटी नहीं है, सुबह उठाने की जरुरत नही, यह सब साफ़ करके सोजाओ। अदिति ने कैंची राखी, अपने बालो को देखा, बालो के अंत तेरे मेरे थे, उसने अपने कटे हुए बालो को उठाया, वो लगभग ५’’ के थे। उसे फिर से रोना आ गया। वो कभी १’’ से ज्यादा नही कटवाती थी। उसने सब साफ़ किया, अक प्लास्टिक के थेले में भरा और सोने चली गई। उसे नींद आते आते पांच बज गए।
सुबह के छह बजे, अदिति का फ़ोन बजा, दो बार बजने के बाद तीसरी बार बजते, अंकुर ने उठाया। अंकुर की नीद वही टूट गई।
सुबह के ग्यारह बजे है, अदिति अभी भी सो रही थी। अंकुर कमरे में नास्ते के साथ आया। अदिति चुरीदार पहेनकर सोति है। पीले चुरीदार में अदिति का शरीर देखकर उससे बहुत अच्छा लगा। उसने अदिति को उठाया, “ ओ अदिति, उठ भी जाओ”। अदिति अचानक से चोंक कर उठ गई। दो साल के इस जीवन में उसे कभी उठाने के जरुरत नही पारी। अंकुर ने बढे प्यार से कहा, “नास्ता लाया हूँ करलो, फिर बाहर बगीचे में आ जाना”।
अदिति को ये सब बहुत अजीब लग रहा था, उसे कभी  से उठकर ककी नास्ता अपनी माँ के पास भी नहीं मिला था। उसने मुह धोया नास्ता किया और बगीचे की तरफ चल दि।
बगीचे में अदिति ने देखा, अंकुर किसी दोस्त के साथ बैठा हुआ है। उसने अपना हुलिया थोरा ठीक बनाया, बालो का जूडा बना लिया और उनके सामने गई।
वह उसे एक झटका लगा। वो अंकुर का दोस्त और कोई नही, एक नाई था। अदिति ने उस नाई से आंख मिलाई फिर अंकुर की तरफ देखा। अंकुर हँसते हुए बोले, “चलिए भाईसाहब, वो आ गई, अदिति इनसे मिलो, यह नितिन जी है, सुबह येही रास्ते से जा रहे थे, मेने बुला लिया और भाईसाहब येही है मेरी धरम पत्नी”।
नितिन जी ने कहा, “येही करे?” अंकुर ने हा कहे दिया और पूछा कुछ चाहिए की नहीं। नितिन जी ने कहा, एक बाल्टी पानी चाहिए। अंकुर ने अदिति को इशारा किया लाने को, वो घर के तरफ गई। नितिन जी, अपने औजार निकलने लगे और पूछा, “पूरा गंजा तो? सोच लिजीये” । अंकुर ने कहा, “हाँ भाईसाहब. हाँ, आप उससे कोई सवाल नही करेंगे, वो बैठेगी, आप अपनी काम करेंगे”।
दस मिनट होने पर भी जब वो नही आये, तो अंकुर उससे धुंडने गया। उसे वो रसोईघर में मिले, एक बाल्टी पानी के साथ, रोती हुई। अदिति ने पूछा, “मेरे सब बाल कटा दोगे?” अंकुर ने कहा, “और कुछ उपाय रहा कहा?” “में उसे भुला दूंगी, सब कुछ नए से सुरु होगा”,उसने कहा। अंकुर ने जवाब दिया, “ वो सिर्फ तुम्हारे बालो को चाहता है, में येही साबित कर रहा हूँ, और ये सब में सब कुछ नए से करने के लिए ही कर रहा हूँ। अब तुम चलोगी कि, तुम्हारे बालो को पकरकर घसीट हुए ले चालू उस नाई के पास”।
अदिति कुछ बोली नही, चुपचाप चलना सुरु किया। वो बगीचे में गई। नाई वह तैयार बैठा था, वो जैसे ही कुर्सी पर बैठी, नाई ने उससे अक सफ़ेद कपड़े ढक दिया। उसका पिला चुरीदार का कुछ भाग बहार निकला रहा। नाई ने फिर उसके जूडे को खोला, उसके बालो को निचे आने दिया।
अदिति के बाल उसके पिठ तक आ रहे थे, नाई ने फिर कंगी उठाई, और उसके बालो को कंगी करने लगा। वो बोला, “ आपे बाल तो बहुत ही आचे है, ऐसे बाल मेने इस पीढ़ी के लार्कियो में शायद पहेली बार देखा है“। किसी ने कुछ नहीं कहा, तो वो अपना काम करता रहा। उसने फिर अक ribbon निकली और, उसके गर्दन के पास उसके बालो में कस कर बांध दि, और एक दुसरे ribbon से निचे पीठ के पास बांधी। उसने फिर कैंची निकाली। कैंची को उसने ऊपर वाले ribbon के ऊपर रखा और कच्च्च्च………च्च्चच्च्च…..च्च्च्छह्छ्. अदिति के चोटी, नाई के हाथ में आ गई।
उसने उस चोटी को अदिति के गोद में फैक दिया, अदिति ने उसे झट जमीन में फैक दिया।302230_153172861440351_796001096_nनाई इस पर बोला, “अभी तो आपके सिर में था तो इतना पसंद करती थी, अब आप इससे नफरत करने लगी। आपको सिर्फ पकरने दिया था, पता है, इस बाल के कितने पैसे मिलेंगे?” अंकुर ने बिच में उसे रोक दिया, “छोरिये ना, वो बचपन से आपनी चोटो अपने सिर पे देखते आई है, डर गई होगी”।
नाई ने फिर उसके बालो को ऊँगली से अच्छी तरह हिलाया, फिर उसका मुंडी आगे की तरफ झुकाकर, एक लोटे से उसके सिर में पानी डालने लगा,उसने आद्जा बाल्टी पानी ख़तम कर दिया। फिर उसने अपनी दो उंगलियो को उसके बालो में घुसा दिया, और उंगलियो को ऊपर निचे करने लगा। उसके पुरे सिर को आची तरह मालिस करने लगा। भीगे सिर के वजह से, उसके ऊपर चारा सफ़ेद भीग गया। अदिति को समाज में आ रहा था कि उसका पिला चुरीदार भी अन्दर से भीग रहा है।
मालिस करने के बाद, नाई एक उस्तरा निकला, उसके सिर को थोरा सामने की तरफ झुकाया, और सिर के ऊपर से सामने की तरफ उस्तरा चला दिया। उसके काले बाल उसकी गोद में गिर गए। वो ऊपर से सामने चला ता रहा, और उसका गोद उसीके बालो से भर गया। फिर वो दाहिने और बाएँ चलने लगा, अंत में पीछे की तरफ। उसका मुह, उसके आस पास की घास, सब उसके बालो से भर गया।
पूरा सिर बालो से मुक्त होने के बाद, नाई ने उस पर हाथ फेरा, अक दो जगह पर चलाया, फिर तसल्ली होने पर चोर दिया।
उसने फिर सफ़ेद से बालो को हटाया, उसे धीरे से खोला, फिर उसी कपड़े से उसका मुंह, उसका सिर , उसका गर्दन साफ़ कर दिया। उसने फिर कुर्सी को थोरा हिलाया, ताकि वो उठ जाये।
अदिति कुर्सी से उठी, उसके बदन के कपड़े हलके भीगे थे, उसके आंख में आसू थे, वो अपने सिर के पीछे हाथ दि और फिर दौर के अपने कमरे में चली गई।
अंकुर ने नाई के साथ पैसे का हिसाब किया, उससे चोटी को बेच देने कहा, और वो पैसे अपने पास रख लेने। फिर वो अदिति के कमरे की योर चला गया।
अदिति का दरवाजा बंद था, उसके कई बार खटखटाने पर उसने दरवाजा खोला। उसने कहा, “जितना रोना है तो लो, सिर्फ एक बात सुन लो। सुबह तुम्हारे प्रेमी का फ़ोन आया था, आज चार बजे मिलने कहा है, कॉलेज के पास वाले झील में।“ उसने कहा, “में नहीं जाउंगी, में उसे भुलाना चाहती हूँ”। अंकुर ने कहा, “तुम्हे जाना होगा, में तुम्हे जाने को कहे रहा हूँ, अगर उसने आज तुम्हे अपना लिया, तो में तुम्हे खुसी खुसी तलाक दे दुंगा”।
चार बजे, अदिति निश्चित जगह पर पहुँच गई। लाल सलवार कमीज़ में गंजी सिर के साथ बहुत अजीब लग रही थी। उसका प्रेमिक आया, पर पांच मिनट के अन्दर ही चला गया।
तीन हफ्ते बाद
अदिति को यकीन हो गया, की वो प्रेमिक सिर्फ उसके बालो को छठा था, उसे उसने चार दिन तक लगातार फ़ोन किया पर उसने अक बार भी नहीं उठाया। उसे साबुत मिल गया, उसे इस दुनिया में अंकुर से ज्यादा कोई नहीं चाहता। क्योंकि, तकली होने के बाद भी, गैर मर्द के साथ संपर्क के बाद भी, अंकुर का उसके लिए प्यार थोरा कम नही हुआ था।

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